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- – यह कविता सुदामा की भावनाओं और उनके दुःख को व्यक्त करती है, जो भगवान कृष्ण (कन्हैया, मुरारी) के दर पर आते हैं।
- – सुदामा अपने जीवन की कठिनाइयों, गरीबी और तन्हाई को भगवान के सामने प्रकट करते हैं।
- – वे भगवान से अपनी परीक्षा लेने और उनकी मदद करने की विनती करते हैं।
- – कविता में सुदामा की ममता, आशा और विश्वास झलकता है कि भगवान उनके दुःख को समझेंगे और सहायता करेंगे।
- – यह रचना भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है, जिसमें भक्त अपने भगवान से सीधे संवाद करता है।

आओ कन्हैया,
आओ मुरारी,
तेरे दर पे आया,
सुदामा पुजारी।।
तर्ज – तुम्ही मेरे मंदिर।
क्या मैं बताऊँ,
क्या मैं सुनाऊँ,
एक दुःख नहीं जो मैं,
मन में छिपाऊँ,
घट घट की जानते हो,
तुम सब मुरारी,
तेरे दर पे आया,
सुदामा पुजारी।।
ना तो डगर हैं,
ना कोई घर हैं,
फटे हुए कपड़े हैं,
तुझे सब खबर हैं,
क्या तुम परीक्षा,
लेते हमारी,
तेरे दर पे आया,
सुदामा पुजारी।।
नैनो में आँसू,
उठे ना कदम है,
आओ कन्हैया अब तो,
होठों पे दम है,
जरा आके देखो,
दशा तुम हमारी,
तेरे दर पे आया,
सुदामा पुजारी।।
आओं कन्हैया,
छूटे अब दम है,
अगर अब ना आए तो,
माँ की कसम है,
माँ की कसम सुनके,
पहुँचे मुरारी,
तेरे दर पे आया,
सुदामा पुजारी।।
आओ कन्हैया,
आओ मुरारी,
तेरे दर पे आया,
सुदामा पुजारी।।
अस्वीकरण (Disclaimer) : नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर HinduismFAQ में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। 'HinduismFAQ' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।
