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आया हूँ तेरे दर पे ऐ श्याम खाटू वाले भजन लिरिक्स – Aaya Hoon Tere Dar Pe Ai Shyam Khatu Wale Bhajan Lyrics – Hinduism FAQ

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  • – यह कविता श्याम खाटू वाले बाबा के प्रति भक्ति और समर्पण की अभिव्यक्ति है।
  • – कवि अपने जीवन की कठिनाइयों और संघर्षों से हारा हुआ महसूस करता है और बाबा के चरणों में शरण चाहता है।
  • – जीवन की भीड़ और झूठे संसार से तंग आकर, वह सत्य मार्ग और सत्संग की ओर अग्रसर होना चाहता है।
  • – माया और भटकाव से बचने के लिए वह बाबा से मार्गदर्शन और सेवा का अवसर मांगता है।
  • – कविता में भक्तिभाव और आत्मसमर्पण की भावना प्रमुख रूप से व्यक्त की गई है।

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आया हूँ तेरे दर पे,
ऐ श्याम खाटू वाले,
हारा हुआ हूँ जग से,
चरणों में तू बिठा ले,
आया हूँ तेरे दर पे।।

तर्ज – मुझे इश्क है तुझी से।



दुनिया की भीड़ में तो,

जीना हुआ है मुश्किल,
रस्ते में ठोकरे थी,
मुझको मिली ना मंजिल,
अब तो ये जिंदगानी,
कर दी तेरे हवाले,
हारा हुआ हूँ जग से,
चरणों में तू बिठा ले,
आया हूँ तेरे दर पे।।



बाबा मैं सत्य पथ पे,

चलता रहा अकेले,
लेकिन मिले मुझे तो,
झूठे ये जग के मेले,
सत्संग की अगन में,
मुझको भी तू तपा ले,
हारा हुआ हूँ जग से,
चरणों में तू बिठा ले,
आया हूँ तेरे दर पे।।



जो भी कदम बढाऊँ,

माया पुकारती है,
भटके नही कभी वो,
जिनका तू सारथि है,
‘चोखानी’ चाहे सेवा,
चाकर मुझे बना ले,
हारा हुआ हूँ जग से,
चरणों में तू बिठा ले,
आया हूँ तेरे दर पे।।



आया हूँ तेरे दर पे,

ऐ श्याम खाटू वाले,
हारा हुआ हूँ जग से,
चरणों में तू बिठा ले,
आया हूँ तेरे दर पे।।

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स्वर – संजय जी सोनी।


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