- – यह गीत जीवन की कठिनाइयों और माया के संसार में डूबने से बचने की अपील करता है।
- – अपने दोषों और गलतियों को स्वीकार करते हुए, सच्चाई और अच्छाई की ओर बढ़ने का संदेश देता है।
- – पैसा, शोहरत और इज्जत की अंधी दौड़ में फंसने से बचने की चेतावनी दी गई है।
- – दुःख के समय में साथ देने वाले सच्चे रिश्तों और आशा की महत्ता को उजागर किया गया है।
- – गीत में आत्मसमर्पण और ईश्वर के चरणों में हार मानकर शांति पाने की भावना व्यक्त की गई है।
- – “बाँह पकड़ ले साँवरा” का अर्थ है कि जीवन की इस यात्रा में ईश्वर या प्रियतम का साथ कभी न छोड़ना।

बाँह पकड़ ले साँवरा,
कही छूट ना जाए।
दोहा – मेरे ऐब गुनाह ना वेख मेरे बाबा,
नी मैं ऐबा नाल भरपूर,
चंगिया हर कोई गल लांदा,
नी मेनू मंदे नु कर मंजूर।
बाँह पकड़ ले साँवरा,
कही छूट ना जाए,
जग माया के इस दरिया में,
जग माया के इस दरिया में,
डूब ना जाए,
बांह पकड़ ले साँवरा,
कही छूट ना जाए।।
जिनको अपना मान के,
नाज़ किया था कितना,
दुःख आया तो,
साथ रहा ना कोई अपना,
दुःख आया तो,
साथ रहा ना कोई अपना,
बस इक आस बची बाबा,
बस इक आस बची बाबा,
कहीं टूट ना जाए,
बांह पकड़ ले साँवरा,
कही छूट ना जाए।।
पैसा शोहरत नाम और इज्जत,
जोड़ रहा था,
ना जाने किस,
अंधी दौड़ में दौड़ रहा था,
ना जाने किस,
अंधी दौड़ में दौड़ रहा था,
पाप ही पाप भरी गागर ये,
पाप ही पाप भरी गागर ये,
कहीं फुट ना जाए,
बांह पकड़ ले साँवरा,
कही छूट ना जाए।।
अब भी हार के बैठ गया,
तेरे इन चरणों में,
‘लहरी’ आजा बस जा,
मेरे इन नैनो में,
‘लहरी’ आजा बस जा,
मेरे इन नैनो में,
आजा रे आँखे कबतक मेरी,
आजा रे आँखे कबतक मेरी,
नीर बहाए,
बांह पकड़ ले साँवरा,
कही छूट ना जाए।।
बाँह पकड़ ले साँवरा,
कही छूट ना जाए,
जग माया के इस दरिया में,
जग माया के इस दरिया में,
डूब ना जाए,
बांह पकड़ ले साँवरा,
कही छूट ना जाए।।
Singer – Uma Lahari ji
