मुख्य बिंदु
- – जीवन का अमृतमय समय (बेला) व्यर्थ न गवाएं, आलस्य से बचें क्योंकि समय पुनः नहीं आता।
- – भाग्यशाली लोग अपने प्रयासों से जीवन को संवारते हैं, जबकि आलसी व्यक्ति अवसर गंवाता है।
- – प्रभु की कृपा से मिला मानव शरीर अनमोल है, इसे व्यर्थ न करें और सही मार्ग पर चलें।
- – सांस एक-एक अनमोल है, इसे अमृत की तरह समझकर सही दिशा में उपयोग करें, विष पीने जैसा नुकसान न करें।
- – ऋषि-मुनियों और गुरुजनों के ऋण को न भूलें, उनका नाम लेकर जीवन को पवित्र बनाएं।
- – समय के महत्व को समझें, आलस्य छोड़कर जागरूक बनें, क्योंकि साथी सभी जाग चुके हैं, केवल आप ही सोए हैं।

भजन के बोल
बेला अमृत गया,
आलसी सो रहा बन आभागा,
साथी सारे जगे, तू न जागा,
बेला अमृत गया,
आलसी सो रहा, बन आभागा,
साथी सारे जगे, तू न जागा,
झोलियाँ भर रहै भाग्य वाले,
लाख पतितो ने जीवन सम्भाले,
रंक राजा बने, प्रभु रस में सने, कष्ट भागा,
साथी सारे जगे, तू न जागा,
॥ बेला अमृत गया…॥
प्रभु कृपा से नर तन यह पाया,
आलसी बनकर यूँ ही गँवाया
उल्टी हो गई मती,
कर ली अपनी छती, चोला त्यागा,
साथी सारे जगे, तू न जागा,
॥ बेला अमृत गया…॥
स्वास एक एक अनमोल बीता,
अमृत के बदले विष को तू पीता,
सौदा घाटे का कर,
हाथ माथे पे धर, रोने लगा,
साथी सारे जगे, तू न जागा,
॥ बेला अमृत गया…॥
मानव कुछ भी न तूने बिचारा,
सिर से ऋषियो का ऋण न उतारा,
गुरु का नाम न लिया,
गंदा पानी पीया, बन के कागा,
साथी सारे जगे, तू न जागा,
॥ बेला अमृत गया…॥
बेला अमृत गया,
आलसी सो रहा, बन आभागा,
साथी सारे जगे, तू न जागा,
