जो देणो है सो बाँट दे ॥
द्वार तुम्हारे आए,
ये सब बालक तेरे बाबा,
कोई नहीं पराए,
बोले जय जयकार रात दिन,
तेरा ही गुण गाए,
बात बात में खर्चो लागे,
मांगण ने कित जावे,
हाँ मांगण ने कित जावे,
टाबरिया बैठ्या है,
कड़की को फंदो काट दे,
टाबरिया बैठ्या है,
जो देणो है सो बाँट दे ॥
दीनानाथ दया का सागर,
जाणे दुनिया सारी,
साँची कहणो पाप नहीं है,
सुणलो बात हमारी,
मैं हाँ पक्का ग्रहस्ती बाबा,
ना कोई श्यामि मोड़ा,
खाली झोली भरे बिना म्हे,
आज तने नहीं छोड़ा,
हाँ आज तने नहीं छोड़ा,
टाबरिया बैठ्या है,
तू हंस के दे या डांट दे,
टाबरिया बैठ्या है,
जो देणो है सो बाँट दे ॥
विनती करके हार गया सब,
बजा बजा के ताली,
अर्जी सुणल्यो बालाजी,
म्हारी जेब पड़ी है खाली,
बलशाली तू दानी कुहावे,
थारे क्या को घाटों,
भर्या खजाना खोल बिहारी,
चाहे जितना बांटों,
टाबरिया बैठ्या है,
जीवन में आनंद डाल दे,
टाबरिया बैठ्या है,
जो देणो है सो बाँट दे ॥
टाबरिया बैठा है,
जो देणो है सो बाँट दे ॥
भजन: टाबरिया बैठा है, जो देणो है सो बाँट दे
भजन “टाबरिया बैठा है, जो देणो है सो बाँट दे” में भगवान से प्रार्थना और उनकी दया की याचना का एक गहरा और मार्मिक चित्रण है। इसमें भक्त की विनम्रता, समर्पण और भगवान की करुणा के प्रति पूर्ण विश्वास को व्यक्त किया गया है। अब हम प्रत्येक पंक्ति का गहन विश्लेषण करेंगे, जिसमें भजन के भाव, प्रतीकात्मकता और आध्यात्मिक संदेश की गहराई को समझाया जाएगा।
टाबरिया बैठा है, जो देणो है सो बाँट दे
यह पंक्ति भगवान और भक्त के रिश्ते की नींव को प्रस्तुत करती है। “टाबरिया” का अर्थ है बच्चे। भक्त खुद को भगवान का निर्दोष और पूर्ण रूप से निर्भर बच्चा मानता है। यहाँ यह बात निहित है कि जैसे एक बच्चा अपने माता-पिता पर पूरी तरह निर्भर होता है, उसी तरह भक्त भी भगवान की कृपा और अनुग्रह पर निर्भर है।
“जो देणो है सो बाँट दे” भगवान की असीम कृपालुता की ओर इंगित करता है। भक्त यह मानता है कि भगवान के पास असीम खजाना है, जिसे वह जितना चाहें बाँट सकते हैं। यह पंक्ति हमें भगवान पर विश्वास रखना सिखाती है कि वह हमारी जरूरतों को जानते हैं और उचित समय पर हमें सब कुछ प्रदान करेंगे।
दूर दूर से दौड़ दौड़ के, द्वार तुम्हारे आए
यहाँ भक्त यह समझाने की कोशिश करता है कि भगवान की महिमा इतनी व्यापक है कि भक्त दुनिया के हर कोने से उनकी शरण में आते हैं। “दूर-दूर से दौड़-दौड़ के” का प्रयोग भक्तों की तीव्र भक्ति और भगवान के प्रति उनकी तीव्र आकांक्षा को दर्शाता है।
द्वार यहाँ भगवान की कृपा और उनके घर का प्रतीक है। द्वार पर पहुँचना यह दर्शाता है कि भक्त अपने जीवन की हर समस्या और हर प्रश्न का समाधान भगवान में ही देखता है। यह पंक्ति हमें सिखाती है कि कठिनाइयों के समय हमें ईश्वर की शरण में जाना चाहिए और उनकी अनंत दया पर विश्वास रखना चाहिए।
ये सब बालक तेरे बाबा, कोई नहीं पराए
यहाँ भक्त भगवान को यह याद दिला रहा है कि उनके द्वार पर आने वाले सभी उनके ही बच्चे हैं। “कोई नहीं पराए” का अर्थ है कि भगवान की दया और कृपा के लिए हर कोई समान है। यहाँ भक्त यह समझाने की कोशिश करता है कि भगवान के लिए किसी के साथ भेदभाव करना संभव नहीं है, क्योंकि वह अपने सभी भक्तों को एक समान प्रेम और दया से देखते हैं।
यह पंक्ति हमें यह सीख देती है कि ईश्वर के दरबार में जाति, धर्म, भाषा या स्थिति का कोई महत्व नहीं है। वह हर किसी को अपनी संतान मानते हैं और उनकी दया हर किसी के लिए उपलब्ध है।
बोले जय जयकार रात दिन, तेरा ही गुण गाए
यह पंक्ति भगवान की महिमा के निरंतर गान का वर्णन करती है। भक्त कहता है कि भगवान के भक्त दिन-रात उनकी जय-जयकार करते हैं और उनकी महिमा गाते हैं। यहाँ भगवान की स्तुति के माध्यम से भक्ति की अनवरत प्रकृति को दर्शाया गया है।
“रात दिन” का उल्लेख यह बताने के लिए है कि सच्चा भक्त हर समय अपने भगवान के गुण गाने में तल्लीन रहता है। यह हमें यह सिखाता है कि भक्ति केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है; यह जीवन जीने का एक तरीका है, जिसमें हर क्षण भगवान के प्रति आभार और प्रेम व्यक्त किया जाता है।
बात बात में खर्चो लागे, मांगण ने कित जावे
यहाँ भक्त अपनी कठिनाइयों और संघर्षों का वर्णन करता है। वह कहता है कि उसकी स्थिति ऐसी हो गई है कि हर छोटी बात में उसे खर्च करना पड़ता है और बार-बार दूसरों से मदद मांगनी पड़ती है। “मांगण ने कित जावे” एक गहरी पीड़ा और लाचारी का प्रतीक है।
यह पंक्ति यह दर्शाती है कि भक्त पूरी तरह भगवान पर निर्भर है और यह विश्वास रखता है कि उसकी सभी परेशानियों का हल केवल भगवान ही कर सकते हैं। यह हमें यह सिखाती है कि जब हम असहाय महसूस करते हैं, तो हमें अपने जीवन की हर समस्या को भगवान के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए।
हाँ मांगण ने कित जावे, टाबरिया बैठ्या है, कड़की को फंदो काट दे
भक्त भगवान से कहता है कि उसकी गरीबी और परेशानियों का अंत करें। “कड़की को फंदो काट दे” का गहरा अर्थ है। यह न केवल आर्थिक संकट का प्रतीक है, बल्कि जीवन के सभी प्रकार के बंधनों, परेशानियों और मानसिक कष्टों का भी।
यहाँ यह स्पष्ट है कि भक्त अपने जीवन की हर समस्या का समाधान भगवान में देखता है। यह पंक्ति हमें सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ हों, हमें भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए और उनकी कृपा पर भरोसा करना चाहिए।
दीनानाथ दया का सागर, जाणे दुनिया सारी
भक्त भगवान को “दीनानाथ” और “दया का सागर” कहकर संबोधित करता है। “दीनानाथ” का अर्थ है दीनों (गरीब और लाचार लोगों) का नाथ (स्वामी)। यह बताता है कि भगवान सभी के रक्षक और पालनकर्ता हैं, विशेष रूप से उन लोगों के, जो समाज में हाशिए पर हैं।
“दया का सागर” भगवान की असीम करुणा का प्रतीक है। यह हमें यह सिखाता है कि भगवान की दया और कृपा अनंत है, और वह हर किसी की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।
साँची कहणो पाप नहीं है, सुणलो बात हमारी
यहाँ भक्त भगवान से अपनी बात सुनने का आग्रह करता है। “साँची कहणो पाप नहीं है” का अर्थ है कि वह जो कुछ कह रहा है, वह पूर्ण सत्य है और उसमें किसी प्रकार का छल या कपट नहीं है।
यह पंक्ति यह दर्शाती है कि भक्त भगवान से पूरी ईमानदारी और सच्चाई के साथ प्रार्थना कर रहा है। यह हमें यह सिखाती है कि भगवान के साथ हमारे संबंध में सच्चाई और ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण हैं।
मैं हाँ पक्का ग्रहस्ती बाबा, ना कोई श्यामि मोड़ा
यह पंक्ति भक्त के जीवन के यथार्थ को दर्शाती है। वह खुद को “पक्का ग्रहस्ती” कहता है, जिसका अर्थ है कि वह एक सामान्य गृहस्थ जीवन जी रहा है। “ना कोई श्यामि मोड़ा” का अर्थ है कि वह सांसारिक छल-कपट या चतुराई में नहीं लगा है।
यह पंक्ति यह सिखाती है कि भगवान के साथ संबंध बनाने के लिए किसी विशेष योग्यता या स्थिति की आवश्यकता नहीं है। सच्चा प्रेम और विश्वास ही पर्याप्त है।
खाली झोली भरे बिना म्हे, आज तने नहीं छोड़ा
यहाँ भक्त अपनी मजबूरी और दृढ़ संकल्प को व्यक्त करता है। “खाली झोली” न केवल आर्थिक अभाव का प्रतीक है, बल्कि यह जीवन में मानसिक और आध्यात्मिक खालीपन का भी प्रतीक है। भक्त भगवान से कहता है कि वह तब तक उनकी शरण नहीं छोड़ेगा, जब तक कि भगवान उसकी झोली भर न दें।
यह पंक्ति भगवान के प्रति अटूट विश्वास और उनकी कृपा पर निर्भरता को दर्शाती है। यह हमें यह सिखाती है कि हमें भगवान से प्रार्थना करते समय धैर्य और विश्वास रखना चाहिए। जब तक हमारी प्रार्थनाएँ पूरी नहीं होतीं, हमें उनकी कृपा का इंतजार करना चाहिए।
तू हंस के दे या डांट दे, टाबरिया बैठ्या है
यह पंक्ति भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण और भक्त की निःस्वार्थ भक्ति को दर्शाती है। भक्त कहता है कि भगवान चाहे मुस्कुराकर उसे आशीर्वाद दें या डांटकर, वह भगवान के चरणों में बना रहेगा। “हंस के” देना भगवान की कृपा का प्रतीक है, जबकि “डांट दे” भगवान की परीक्षा या उनके द्वारा दिए गए जीवन के कठिन सबक का प्रतीक है।
यह हमें सिखाती है कि सच्चा भक्त भगवान की हर स्थिति को स्वीकार करता है, चाहे वह सुख हो या दुःख। यह भक्ति का उच्चतम स्तर है, जहाँ भक्त किसी भी परिस्थिति में भगवान से जुड़े रहने का संकल्प करता है।
विनती करके हार गया सब, बजा बजा के ताली
यहाँ भक्त अपनी प्रार्थना की तीव्रता को व्यक्त करता है। “विनती करके हार गया” से यह पता चलता है कि उसने भगवान से हर संभव तरीके से प्रार्थना की है। “बजा बजा के ताली” एक प्रतीकात्मक पंक्ति है, जो दर्शाती है कि उसने भगवान का ध्यान आकर्षित करने के लिए हर संभव प्रयास किया है।
यह पंक्ति हमें सिखाती है कि भगवान से प्रार्थना करते समय प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाते। भले ही उत्तर तुरंत न मिले, लेकिन प्रार्थना का प्रभाव समय के साथ दिखता है। यह धैर्य और निरंतरता का संदेश देती है।
अर्जी सुणल्यो बालाजी, म्हारी जेब पड़ी है खाली
भक्त बालाजी से अपनी याचना सुनने का आग्रह करता है। “म्हारी जेब पड़ी है खाली” से उसकी गरीबी और अभाव का गहन चित्रण होता है। यहाँ “जेब खाली” केवल आर्थिक स्थिति को नहीं, बल्कि जीवन में खुशी, संतोष और मानसिक शांति की कमी को भी दर्शाता है।
यह हमें यह सिखाती है कि जब जीवन में हर दिशा से निराशा हो, तो भगवान के चरणों में अपनी समस्याओं को समर्पित करना ही सबसे सही उपाय है। भगवान से अपनी स्थिति को साझा करना भक्त और भगवान के बीच के गहरे और व्यक्तिगत संबंध को मजबूत करता है।
बलशाली तू दानी कुहावे, थारे क्या को घाटों
यह पंक्ति भगवान की महिमा और उनकी दानवीरता का वर्णन करती है। “बलशाली” का अर्थ है शक्तिशाली, और “दानी” का अर्थ है वह जो उदारतापूर्वक देता है। भक्त कहता है कि भगवान इतने दयालु और सक्षम हैं कि उन्हें कुछ देने से कोई हानि नहीं होती।
यह हमें सिखाती है कि भगवान के खजाने असीमित हैं। उनकी कृपा और अनुग्रह हर किसी के लिए पर्याप्त है। भक्त इस विश्वास के साथ भगवान से याचना करता है कि उनकी कृपा से सब कुछ संभव है।
भर्या खजाना खोल बिहारी, चाहे जितना बांटों
यहाँ भक्त भगवान से आग्रह करता है कि वह अपने “भरे हुए खजाने” को खोलें और उदारतापूर्वक उसे बाँटें। “भर्या खजाना” भगवान की असीम संपत्ति और अनंत कृपा का प्रतीक है।
यह पंक्ति दर्शाती है कि भक्त भगवान से उनकी कृपा के किसी सीमित हिस्से की अपेक्षा नहीं करता। वह पूरी तरह से भगवान पर निर्भर है और चाहता है कि भगवान उसे वह सब कुछ दें, जिसकी उसे आवश्यकता है। यह भक्ति में विश्वास और आशा का प्रतीक है।
टाबरिया बैठ्या है, जीवन में आनंद डाल दे
भक्त अपनी प्रार्थना को निष्कर्ष की ओर ले जाते हुए कहता है कि भगवान उसकी कठिनाइयों को दूर करें और उसके जीवन में आनंद भर दें। “जीवन में आनंद” का अर्थ केवल सुख और खुशी नहीं है, बल्कि यह आंतरिक शांति, संतोष और आध्यात्मिक उत्थान का प्रतीक है।
यह हमें यह सिखाती है कि भगवान से केवल भौतिक संपत्ति की ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शांति की भी प्रार्थना करनी चाहिए। जीवन का असली आनंद तभी संभव है, जब हम भगवान की कृपा को अपने जीवन में अनुभव करें।
टाबरिया बैठा है, जो देणो है सो बाँट दे (पुनरावृत्ति)
भजन का समापन उसी पंक्ति से होता है, जिससे इसकी शुरुआत हुई थी। यह भगवान और भक्त के बीच के रिश्ते की गहराई को फिर से रेखांकित करता है। भक्त भगवान को याद दिलाता है कि वह उनके दर पर एक बच्चे की तरह बैठा है और जो कुछ भी भगवान उसे देना चाहें, वह कृपापूर्वक उसे प्रदान करें।
इस पंक्ति में भजन का मुख्य संदेश छिपा है – भगवान के प्रति पूर्ण विश्वास, समर्पण और उनकी कृपा पर निर्भरता। यह हमें सिखाती है कि भगवान से जुड़ने के लिए हमें एक बच्चे की मासूमियत और पूर्ण भरोसा विकसित करना चाहिए।
भजन का आध्यात्मिक संदेश
यह भजन केवल एक प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह भक्ति के गहरे आध्यात्मिक पहलुओं को उजागर करता है। इसमें निम्नलिखित संदेश छिपे हैं:
- समर्पण और विनम्रता: भक्त भगवान के सामने पूरी विनम्रता के साथ अपनी स्थिति को स्वीकार करता है और उनकी कृपा के लिए प्रार्थना करता है।
- विश्वास और धैर्य: भगवान पर विश्वास रखते हुए धैर्य बनाए रखना भक्ति का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
- आध्यात्मिक सुख की प्राथमिकता: भजन सिखाता है कि भौतिक सुखों से अधिक महत्वपूर्ण आंतरिक शांति और संतोष है।
- सार्वभौमिकता: भगवान की कृपा हर किसी के लिए समान है, और वह भेदभाव नहीं करते।
