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- – यह कविता दुःख के समय भगवान श्याम की शरण लेने की प्रेरणा देती है।
- – जीवन में चाहे कोई साथ दे या न दे, भगवान श्याम हमेशा दुःख में सहारा बनकर आते हैं।
- – कवि अपने सुख-दुःख किसी से साझा नहीं करता, क्योंकि उसका विश्वास श्याम पर पूर्ण है।
- – श्याम बिना बोले ही सभी बातों को समझ जाते हैं और संकट में मदद करते हैं।
- – किसी के आगे अपनी लाज गंवाने की जरूरत नहीं, क्योंकि श्याम की मर्जी सर्वोपरि है।
- – यह कविता भक्ति और विश्वास की भावना को उजागर करती है, जो दुःख में शक्ति प्रदान करती है।

दुःख में यही तेरे काम आएगा,
कोई आए या ना आए,
मेरा श्याम आएगा,
दुःख में यही तेरे काम आएगा।।
तर्ज – पलकों का घर तैयार सांवरे।
दुनिया वालों से मैं अपने,
सुख दुःख कभी ना कहता,
मेरी चिंता करने वाला,
खाटू में है बैठा,
बिन बोले ही सबकुछ,
वो जान जाएगा,
दुःख में यहीं तेरे काम आएगा,
कोई आए या ना आए,
मेरा श्याम आएगा,
दुःख में यही तेरे काम आएगा।।
और किसी के आगे क्यों मैं,
लाज गवाऊ मेरी,
मेरे श्याम को तो बस है,
यहाँ कहने भर की देरी,
जो मैं कहूँगा वो मान जाएगा,
दुःख में यहीं तेरे काम आएगा,
कोई आए या ना आए,
मेरा श्याम आएगा,
दुःख में यही तेरे काम आएगा।।
दुःख में यही तेरे काम आएगा,
कोई आए या ना आए,
मेरा श्याम आएगा,
दुःख में यही तेरे काम आएगा।।
स्वर – मोना मेहता जी।
अस्वीकरण (Disclaimer) : नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर HinduismFAQ में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। 'HinduismFAQ' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।
