- – फागण के मेले में श्याम प्रेमियों के बीच एक अनोखा नशा और उत्साह छा गया है।
- – श्याम मिलन की व्याकुलता में प्रेमी अपने सभी काम छोड़कर खाटू धाम की ओर चल पड़े हैं।
- – श्याम का जादू ऐसा है कि सभी भक्त पैदल या किसी भी साधन से प्रेम और भक्ति में मग्न होकर यात्रा करते हैं।
- – फागण का रंगीन मौसम श्याम प्रभु के रंग में रंगा हुआ है, जिससे प्रेमियों के दिलों में उत्साह और प्रेम की भावना भर गई है।
- – कवि संजय ने मन में ठाना है कि इस फागण के मेले में होली खेलकर श्याम धणी का आशीर्वाद प्राप्त करेगा।
- – यह कविता श्याम भक्तों के प्रेम और भक्ति के उत्सव को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है, जिसमें फागण का मेला एक विशेष महत्व रखता है।

श्याम प्रेमियों के ऊपर,
एक नशा अजब सा छा गया,
फागण का मेला आ गया,
मेरे श्याम का मेला आ गया।।
श्याम मिलन की व्याकुलता में,
छोड़ के अपना सारा काम,
मस्ती में मस्तानों की ये,
चली टोलियाँ खाटू धाम,
ऐसा लगता है इन सबको,
ऐसा लगता है इन सबको,
श्याम संदेसा आ गया,
फागुण का मेला आ गया,
मेरे श्याम का मेला आ गया।।
ऐसा है मेरे श्याम का जादू,
चढ़के नही उतरता है,
कोई पैदल कोई देखो,
पेट पलनिया चलता है,
हर बाबा का प्रेमी देखो,
हर बाबा का प्रेमी देखो,
श्याम ध्वजा लहरा गया,
फागुण का मेला आ गया,
मेरे श्याम का मेला आ गया।।
धूम मची फागण की,
मौसम रंग रंगीला आया है,
श्याम प्रभु ने अपने रंग में,
रंगने खाटू बुलाया है,
प्रेम श्याम का प्रेमियों की,
प्रेम श्याम का प्रेमियों की,
नस नस में समा गया,
फागुण का मेला आ गया,
मेरे श्याम का मेला आ गया।।
इंतजार अब ख़तम हो गया,
इस फागण के मेले का,
ठाना है ‘संजय’ ने मन में,
होली खाटू खेलेगा,
चलो बुलावा श्याम धणी का,
चलो बुलावा श्याम धणी का,
तेरा भी ‘कुंदन’ आ गया,
फागुण का मेला आ गया,
मेरे श्याम का मेला आ गया।।
श्याम प्रेमियों के ऊपर,
एक नशा अजब सा छा गया,
फागण का मेला आ गया,
मेरे श्याम का मेला आ गया।।
स्वर – संजय पारीक जी।
