- – यह भजन भगवान गणेश (विनायक) की स्तुति में लिखा गया है, जिसमें उन्हें गौरी के पुत्र और शंकर लाल के रूप में संबोधित किया गया है।
- – भजन में भगवान गणेश की महिमा, उनके आराधन और पूजा की विधि का वर्णन है, जिसमें मेवा, फल, मोदक और लड्डू भोग के रूप में चढ़ाए जाते हैं।
- – देवताओं सहित सभी भगवान गणेश की स्तुति करते हैं और उनकी आरती गाते हैं, जिससे घर में सुख-समृद्धि और कार्यों की सफलता आती है।
- – ब्रह्मा, विष्णु और शंकर जैसे प्रमुख देवता भी गणेश की महिमा का वर्णन करते हैं और उनका शीश झुकाकर सम्मान करते हैं।
- – भजन में भागवत महापुराण का उल्लेख है, जो भगवान गणेश की कथा और महिमा का स्रोत माना जाता है।
- – यह भजन विनायक से प्रार्थना और आशीर्वाद की विनती करता है, जिससे जीवन में रिद्धि-सिद्धि (समृद्धि और सफलता) प्राप्त हो सके।

गौरी सूत शंकर लाल,
विनायक मेरी अरज सुनो,
बैठा भागवत महा पूराण,
विनायक मेरी अरज सुनो,
गौरी सुत शंकर लाल,
विनायक मेरी अरज सुनो।।
सब देवन मे आप बड़े हो,
तुमको प्रथम मनावे,
घर मे गणपति सदा बिराजे,
कारज शुभ करावे,
संग रिद्धि सिद्धि,
संग रिद्धि सिद्धि आओ आज,
विनायक मेरी अरज सुनो,
गौरी सुत शंकर लाल,
विनायक मेरी अरज सुनो।।
मेवा फल मोदक और लड्डू,
जिनको भोग लगवे,
सखी सहेली मिल करके
सब मंगल आरती गावे,
देव मिलकर,
देव मिलकर चवर दुलावे,
विनायक मेरी अरज सुनो,
गौरी सुत शंकर लाल,
विनायक मेरी अरज सुनो।।
ब्रह्मा विष्णु शंकर भी है,
जिनके गुण को गाते,
महिमा का वर्णन तो,
देवी देव मुनि ना पाते,
सब मिलकर,
सब मिलकर शीश झुकावे
विनायक मेरी अरज सुनो,
गौरी सुत शंकर लाल,
विनायक मेरी अरज सुनो।।
गौरी सूत शंकर लाल,
विनायक मेरी अरज सुनो,
बैठा भागवत महा पूराण,
विनायक मेरी अरज सुनो,
गौरी सूत शंकर लाल,
विनायक मेरी अरज सुनो।।
