- – गुरु दयालु और भोले होते हैं, जो भक्तों की रक्षा करते हैं और उनकी शरण पाने वाले भाग्यशाली होते हैं।
- – गुरु अपने भक्तों के दुखों को सहते हैं और उनकी पीड़ा को समझते हैं।
- – भक्तों के लिए गुरु ने अवतार लिया है ताकि वे जीवों के दुखों को दूर कर सकें और मोक्ष प्रदान कर सकें।
- – सतगुरु की महिमा अपार है और उनका नाम सच्चाई और पवित्रता का प्रतीक है।
- – सच्चे संत और गुरु मिलना दुर्लभ होता है, इसलिए उनकी शरण प्राप्त करना सौभाग्य की बात है।
गुरू दयालू होते है,
बड़े भोले होते है,
मिली गुरू की शरण वो,
किस्मत वाले होते है।।
तर्ज – प्यार दिवाना होता है।
किसी दास को जब कोई,
सताता है ग़म,
नही देख सकते गुरुवर,
उनकी आँखे नम,
वो दयालू भक्तो के ग़म,
खुद ही सहते है,
मिली गुरू की शरण वो,
किस्मत वाले होते है।।
भक्तो के कारण गुरू ने,
लिया अवतार,
हरते जीवो के दुखड़े,
और भव से करते पार,
करते खास कृपा जब,
सतगुरू मौज मे होते है,
मिली गुरू की शरण वो,
किस्मत वाले होते है।।
श्री सतगुरू की जग मे,
महिमा अपार,
साँचा नाम है गुरू का,
साँचा दरवार,
सच्चा सँत जहाँ मे कोई,
बिरले होते है,
मिली गुरू की शरण वो,
किस्मत वाले होते है।।
गुरू दयालू होते है,
बड़े भोले होते है,
मिली गुरू की शरण वो,
किस्मत वाले होते है।।
– भजन लेखक एवं प्रेषक –
शिवनारायण वर्मा,
मोबा.न.8818932923
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