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- – राधे रानी के प्रति गहरा प्रेम और भक्ति व्यक्त की गई है, जहां उन्हें ससुराल के रूप में दर्शाया गया है।
- – वृन्दावन को राधे की माया और भक्तों की मंजिल बताया गया है, जो राधे के चरणों का किनारा है।
- – राधे के चरणों में ब्रह्मांड समाया हुआ है और उनका मंदिर दिल से निकाला नहीं जा सकता।
- – पीहर और बरसाना को धन्य माना गया है, जहां श्याम ने अपनी ससुराल बनाई।
- – राधे के चरण पकड़कर भव सागर को पार करने का संकेत दिया गया है, और राधे की शहनाई बजाने की बात कही गई है।
- – भजन के बजाय राधे के गीत गाने और उनके प्रति समर्पित भाव व्यक्त करने पर जोर दिया गया है।

हम लाज शरम का घुँघटा भई डाल जाते है,
हम तो उस राधे रानी के ससुराल जाते है।।
राधे रानी के चलते वृन्दावन लागे प्यारा,
राधे भक्तो की मंजिल, राधे के चरण है किनारा,
हम भजन नही राधे के भई गीत गाते है,
हमतो उस राधे रानी के ससुराल जाते है।।
वृन्दावन गाँव जरा सा देखो राधे की माया,
राधे के चरण पड़ते ही सारा ब्रहांड समाया,
वो मंदिर है ये दिल से निकाल जाते है,
हमतो उस राधे रानी के ससुराल जाते है।।
धन्य धन्य पीहर ही माटी,
धन्य धन्य उसका बरसाना,
अपनी ससुराल बनाने ये श्याम हुआ था दीवाना,
मस्तक पे उस माटी की रंग गुलाल लगाते है,
हमतो उस राधे रानी के ससुराल जाते है।।
बनवारी करे इशारा तू चरण पकड़ ले उसके,
वो भव सागर का माझी भई पड़ा चरण में जिसके,
हम ढोल नही राधे की शहनाई बजाते है,
हम तो उस राधे रानी के ससुराल जाते है।।
अस्वीकरण (Disclaimer) : नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर HinduismFAQ में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। 'HinduismFAQ' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।
