- – कविता में कन्हैया (भगवान कृष्ण) को एक स्नेहिल और सहायक साथी के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो हर कठिनाई में साथ देता है।
- – जब मन घबराता है या तकलीफ होती है, तब कन्हैया सिरहाने खड़े होकर सांत्वना और आश्वासन देते हैं।
- – जीवन की लहरों और समस्याओं में कन्हैया पतवार की तरह मार्गदर्शन करते हैं और नैया को सुरक्षित रखते हैं।
- – जो लोग दुनिया से ठुकराए जाते हैं, उन्हें कन्हैया प्रेम और सम्मान देते हैं, उनके आंसू पोछते हैं।
- – प्रेम की डोर से जुड़े कन्हैया हर सुख-दुःख में रक्षा करते हैं और जब रास्ता नहीं सूझता, तो प्रेम का दीप जलाकर मार्ग दिखाते हैं।
- – यह कविता भगवान कृष्ण के प्रति गहरे विश्वास और प्रेम की भावना को दर्शाती है, जो हर परिस्थिति में सहारा बनते हैं।

जब कोई तकलीफ सताये,
जब जब मन घबराता है,
मेरे सिरहाने खड़ा कन्हैया,
सर पे हाथ फिराता है।।
तर्ज – राम नाम के हिरे मोती।
लोग ये समझे मैं हूँ अकेला,
मेरे साथ कन्हैया है,
लोग ये समझे डूब रहा मैं,
चल रही मेरी नैया है,
जब जब लहरें आती है,
ये खुद पतवार चलाता है,
मेरे सिरहाने खड़ा कन्हैया,
सर पे हाथ फिराता है।।
जिनके आसूं कोई ना पोछें,
कोई ना जिनसे प्यार करे,
जिनके साथ ये दुनिया वाले,
मतलब का व्यवहार करे,
दुनियां जिसको ठुकराये,
उसे ये पलकों पे बिठाता है,
मेरे सिरहाने खड़ा कन्हैया,
सर पे हाथ फिराता है।।
प्रेम की डोर बंधी प्रीतम से,
जैसे दीपक बाती है,
कदम कदम पर रक्षा करता,
ये सुख दुःख का साथी है,
‘संजू’ जब रस्ता नहीं सूझे,
प्रेम का दीप जलाता है,
मेरे सिरहाने खड़ा कन्हैया,
सर पे हाथ फिराता है।।
जब कोई तकलीफ सताये,
जब जब मन घबराता है,
मेरे सिरहाने खड़ा कन्हैया,
सर पे हाथ फिराता है।।
Singer : Sanju Sharma
