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कैलाशपति संग लेके सती मेरी नैया पार लगा जाना भजन लिरिक्स – Kailashpati Sang Leke Sati Meri Naiya Paar Laga Jana Bhajan Lyrics – Hinduism FAQ

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  • – यह कविता भगवान शिव (कैलाशपति) और माता सती के प्रति भक्ति और प्रार्थना व्यक्त करती है।
  • – कवि अपनी नैया (जीवन) को पार लगाने के लिए शिव और सती से सहायता मांग रहा है।
  • – कवि शिव को पिता, माता, दाता और स्वामी मानकर उनसे अपनी गलतियों को माफ करने की विनती करता है।
  • – आँखों की प्यास बुझाने और मन की कामनाओं को पूरा करने के लिए शिव की दया और दर्शन की प्रार्थना की गई है।
  • – भगवान शिव के विभिन्न नामों जैसे जगतनाथ, रामेश्वर, अमरनाथ, कालेश्वर, मनकामनेश्वर, गंगेश्वर का उल्लेख कर उनकी महिमा का वर्णन किया गया है।
  • – कवि शिव की एक नजर से जीवन के कष्टों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति की आशा करता है।

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कैलाशपति संग लेके सती,
मेरी नैया पार लगा जाना,
इतनी विनती है ब्रम्ह्जति,
गलती को मति तुम चित लाना।।



तुम ही हो पिता तुम ही माता,

मै हूँ आचक तुम हो दाता,
सेवक स्वामी का ये नाता,
मेरे दाता आज निभा जाना,
कैलाशपति संग लेके सती,
मेरी नैया पार लगा जाना,
इतनी विनती है ब्रम्ह्जति,
गलती को मति तुम चित लाना।।



अँखियाँ तेरे दर्शन की प्यासी,

तुम दया करो हे कैलाशी,
हे भंडारी घट घट वासी,
अँखियो की प्यास बुझा जाना,
कैलाशपति संग लेके सती,
मेरी नैया पार लगा जाना,
इतनी विनती है ब्रम्ह्जति,
गलती को मति तुम चित लाना।।



हे जगतनाथ हे रामेश्वर,

हे अमरनाथ हे कालेश्वर,
मनकामनेश्वर हे गंगेश्वर,
मन मंदिर बिच समा जाना,
कैलाश पति संग लेके सती,
मेरी नैया पार लगा जाना,
इतनी विनती है ब्रम्ह्जति,
गलती को मति तुम चित लाना।।

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तेरी एक नज़र जो हो जाये,

कंकड़ भी मोती बन जाये,
भव से ये दास भी तर जाये,
बस एक झलक दिखला जाना,
कैलाश पति संग लेके सती,
मेरी नैया पार लगा जाना,
इतनी विनती है ब्रम्ह्जति,
गलती को मति तुम चित लाना।।


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