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- – कवि अपने दुख और कष्टों के बीच शरण लेने की प्रार्थना करता है।
- – वह अपने माता-पिता और बंधुओं से सहायता न मिलने की व्यथा व्यक्त करता है।
- – दुनिया की माया और लालच में फंसकर वह अकेला और परेशान महसूस करता है।
- – अपने कर्मों को नीच मानते हुए, वह ईश्वरों के पावन नाम में शरण पाना चाहता है।
- – जन्म और मरण के बंधनों से मुक्ति की कामना करता है और ब्रह्मानंद की आशा रखता है।
- – बार-बार “नज़र भर देख ले मुझको, शरण में तेरी आया हूँ” कहकर अपनी विनम्रता और भक्ति व्यक्त करता है।

नजर भर देख ले मुझको,
शरण में तेरी आया हूँ।।
कोई माता पिता बंधू,
सहायक है नहीं मेरा,
सहायक है नहीं मेरा,
काम और क्रोध दुश्मन से,
बहुत दिन से सताया हूँ,
नज़र भर देख ले मुझको,
शरण में तेरी आया हूँ।।
भुला कर याद को तेरी,
पड़ा दुनिया के लालच में,
पड़ा दुनिया के लालच में,
माया के जाल में चारो,
तरफ से मैं फसाया हूँ,
नज़र भर देख ले मुझको,
शरण में तेरी आया हूँ।।
कर्म सब नीच है मेरे,
तुम्हारा नाम है पावन,
तुम्हारा नाम है पावन,
तार संसार सागर से,
गहन जल में डुबाया हूँ,
नज़र भर देख ले मुझको,
शरण में तेरी आया हूँ।।
छुड़ाकर जन्म बंधन से,
चरण में राख ले अपने,
चरण में राख ले अपने,
वो ब्रम्हानंद मैं मन में,
यही आशा लगाया हूँ,
नज़र भर देख ले मुझको,
शरण में तेरी आया हूँ।।
अस्वीकरण (Disclaimer) : नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर HinduismFAQ में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। 'HinduismFAQ' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।
