- – यह गीत राधा और श्याम (कृष्ण) के प्रेम और मित्रता की भावनाओं को दर्शाता है, जहाँ राधा श्याम के लिए विरह में रोती है।
- – कृष्ण अपने मित्र सुदामा के प्रति गहरा प्रेम और सहानुभूति दिखाते हुए उनके दुःख में भी रोते हैं।
- – गीत में कृष्ण की ममता और मित्रता की भावना को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है, जो सच्चे प्रेम और दोस्ती का प्रतीक है।
- – कृष्ण सुदामा के पैरों के छालों को धोते हुए उनकी सेवा में आंसू बहाते हैं, जो उनकी विनम्रता और समर्पण को दर्शाता है।
- – सुदामा के साथ कृष्ण के प्रेम और दोस्ती की गहराई को भावुकता से व्यक्त किया गया है, जहाँ दोनों एक-दूसरे के लिए रोते हैं।
- – यह गीत प्रेम, मित्रता, समर्पण और भावनात्मक जुड़ाव की सुंदर अभिव्यक्ति है, जिसे राकेश काला ने स्वरबद्ध किया है।

राधे इतना रोई विरह में,
श्याम के लिए,
कान्हा उतना रोए देखो,
मित्र सुदामा के लिए,
कान्हा उतना रोए देखो,
मित्र सुदामा के लिए,
कान्हा मेरा मतवाला,
यार मेरा बन्सीवाला।।
तर्ज – जितना राधा रोई।
देखो हालत जो उसकी,
मित्र के हाल पे रोया,
यार के वस्त्र जो देखे,
धन ओ दौलत पे रोया,
रो रो गले लगाया,
रो रो गले लगाया,
यूँ प्यार के लिए,
कान्हा उतना रोए देखो,
मित्र सुदामा के लिए,
कान्हा मेरा मतवाला,
यार मेरा बन्सीवाला।।
पैरो की हालत देखि,
उसे वो देख के रोया,
पैरो के छाले धोए,
उसी की खातिर वो रोया,
आँखों में थे आंसू,
आँखों में थे आंसू,
चरण को धोने के लिए,
कान्हा उतना रोए देखो,
मित्र सुदामा के लिए,
कान्हा मेरा मतवाला,
यार मेरा बन्सीवाला।।
यार आया तो रोया,
यार गया तो रोया,
मुट्ठी भर चावल खा के,
मित्र के प्यार में रोया,
भक्तो वो तो रोया,
भक्तो वो तो रोया,
अपने यार के लिए,
कान्हा उतना रोए देखो,
मित्र सुदामा के लिए,
कान्हा मेरा मतवाला,
यार मेरा बन्सीवाला।।
राधे इतना रोई विरह में,
श्याम के लिए,
कान्हा उतना रोए देखो,
मित्र सुदामा के लिए,
कान्हा उतना रोए देखो,
मित्र सुदामा के लिए,
कान्हा मेरा मतवाला,
यार मेरा बन्सीवाला।।
स्वर – राकेश काला।
