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सररर लेवे रे सबड़को मारो साँवरो भजन लिरिक्स – Sararar Leve Re Sabadko Maro Sanwaro Bhajan Liriks – Hinduism FAQ

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  • – यह गीत राजस्थान की लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की झलक प्रस्तुत करता है, जिसमें सावन के महीने की खुशियाँ और प्रेम की भावनाएँ व्यक्त की गई हैं।
  • – गीत में “साँवरो” का उल्लेख है, जो कृष्ण भगवान का प्रतीक है, और राधा-श्याम के प्रेम को दर्शाया गया है।
  • – गायक श्रवण सेंदरी ने इस गीत को अपनी मधुर आवाज़ में प्रस्तुत किया है, जबकि लेखक सिंगर देव नागर हैं।
  • – गीत में ग्रामीण जीवन की गतिविधियाँ जैसे बाजरे की कटाई और दही खाना भी शामिल हैं, जो स्थानीय जीवनशैली को दर्शाती हैं।
  • – यह गीत सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं से भरपूर है, जो राजस्थान की पारंपरिक लोक कला का हिस्सा है।

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सररर लेवे रे सबड़को मारो साँवरो,

रान्द लाई खीचड़ो,
मैं कूट लाई बाजरो,
सररर लेवे रे सबड़को मारो साँवरो।।



मैं छू भोली जाटणी,

नही दीवानी मीरा,
राधा जैसो प्रेम नही,
मैं भोली भाली जाटणी,
सरर लेवे रे सबड़को मारो साँवरो।।



सावन का महीना के माही,

झूला झूले साँवरो,
राधा राणी घुमर कावे,
मुरली बजावे साँवरो,
सरर लेवे रे सबड़को मारो साँवरो।।



कानुड़ा की महिमा ने,

श्रवण सेंदरी गाय रा,
कानुडो दही खावे रे,
राधा जी थारे कारणे,
सरर लेवे रे सबड़को मारो साँवरो।।



सररर लेवे रे सबड़को मारो साँवरो,

रान्द लाई खीचड़ो,
मैं कूट लाई बाजरो,
सररर लेवे रे सबड़को मारो साँवरो।।

गायक – श्रवण सेंदरी,
लेखक – सिंगर देव नागर,
Ph. 9602975104


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