- – यह दोहा श्यामा (कृष्ण) से भक्ति और कृपा की प्रार्थना है, जिसमें भक्त अपनी शरण में जाने की इच्छा व्यक्त करता है।
- – भक्त बरसाना और ब्रज की गलियों में रहकर श्यामा की सेवा और प्रेम में लीन होना चाहता है।
- – दोहे में श्यामा की ममता, करुणा और प्रेम की महिमा का वर्णन किया गया है, जो भक्तों के लिए आश्रय और सहारा है।
- – भक्त श्यामा के चरणों से जुड़कर जीवन में प्रेम, दया और आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करने की कामना करता है।
- – यह भक्ति गीत श्यामा की कृपा पाने और उनके साथ सदा रहने की अभिलाषा को सुंदर भावों में प्रस्तुत करता है।

श्यामा प्यारी कृपा कीजिये,
दोहा – अब कृपा करो श्यामा प्यारी,
मोहे अपनी शरण लगा लीजे,
बन महल टहलरी रहूं मैं सदा,
बस इतनी आस पूजा दीजे,
विचरत डोलूं ब्रज गलियन में,
बरसाना माहि बसा लीजे,
मैं दिन हिन व्रत शीण प्रिया,
मोहे करुणा कर अपना लीजे,
मोहे करुणा कर अपना लीजे।
श्यामा प्यारी कृपा कीजिये,
चरणों से लगा लीजिये,
बरसाना बसा लीजिये,
मुझको अपना बना लीजिये,
श्यामा प्यारी कृपा कीजिये।।
बरसाने की ऊँची अटारी,
जहाँ विराजे श्यामा प्यारी,
गुण अवगुण ना जानन वारी,
ममता मई वृषभानु दुलारी,
राधे करुणा नजर कीजिये,
आँचल में छुपा लीजिये,
बरसाना बसा लीजिये,
मुझको अपना बना लीजिये,
श्यामा प्यारी कृपा कीजिये।।
बरसाने रस प्रेम अपारा,
बहती है अमृत की धारा,
बेसहारो का है सहारा,
मिलता है यहाँ नन्ददुलारा,
राधे करुणा नजर कीजिये,
प्रीत करना सीखा दीजिये,
बरसाना बसा लीजिये,
मुझको अपना बना लीजिये,
श्यामा प्यारी कृपा कीजिये।।
मोरकुटी पे मोर बिहारी,
प्रेम सरोवर शोभा न्यारी,
गेहबरबन की महिमा भारी,
खोर सांकरी दान बिहारी,
राधे मुझको शरण लीजिये,
ब्रज धूलि बना दीजिये,
बरसाना बसा लीजिये,
मुझको अपना बना लीजिये,
श्यामा प्यारी कृपा कीजिये।।
लौट के श्यामा घर नहीं जाऊँ,
चरणन की रज निशदिन पाऊँ,
मेहलन पौड़ी चढ़ता जाऊँ,
रसिक जनों का संग मैं पाऊँ,
राधे इतनी दया कीजिये,
दूर चरणों से ना कीजिये,
बरसाना बसा लीजिये,
मुझको अपना बना लीजिये,
श्यामा प्यारी कृपा कीजिये।।
श्यामा प्यारी कृपा कीजिये,
चरणों से लगा लीजिये,
बरसाना बसा लीजिये,
मुझको अपना बना लीजिये,
श्यामा प्यारी कृपा कीजिये।।
स्वर – विक्रम जी वेद।
