भजन

तेरी पूजा मे मन लीन रहे: भजन (Teri Pooja Mein Man Leen Rahe)

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तेरी पूजा मे मन लीन रहे,
मेरा मस्तक हो और द्वार तेरा,
मीट जाये जन्मों की तृष्णा,
श्री राम मिले जो प्यार तेरा ॥

तुझमे खोकर जीना है मुझे,
मै बूँद हूँ तु इक सागर है,
तुझ बिन जीवन का अर्थ है क्या,
मै तारा हूँ तु अम्बर है,
तुने मुझको स्वीकार किया,
क्या कम है ये उपकार तेरा,
तेरी पुजा मे मन लीन रहे,
मेरा मस्तक हो और द्वार तेरा ॥

यूँ मुझको तेरा प्यार मिला,
बेजान को जेसे जान मिली,
जिस दिन से तुझको जाना है,
मुझको मेरी पहचान मिली,
देदी तुने चरणों मे जगह,
क्या कम है ये उपकार तेरा,
तेरी पूजा मे मन लीन रहे,
मेरा मस्तक हो और द्वार तेरा ॥

तेरी पूजा मे मन लीन रहे,
मेरा मस्तक हो और द्वार तेरा,
मीट जाये जन्मों की तृष्णा,
श्री राम मिले जो प्यार तेरा ॥

तेरी पूजा मे मन लीन रहे: भजन का गहन विश्लेषण

यह भजन एक साधक की गहन आंतरिक यात्रा को दर्शाता है, जो अपनी आत्मा को भगवान श्री राम के चरणों में समर्पित करता है। इसमें हर पंक्ति में न केवल भक्ति का भाव है, बल्कि आध्यात्मिक अनुभवों का सार भी समाहित है। इसका विश्लेषण करते समय, हमें हर वाक्य की गहराई को समझने का प्रयास करना चाहिए, ताकि इसके आध्यात्मिक और भावनात्मक पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके।


तेरी पूजा मे मन लीन रहे

यह वाक्य भक्ति की उस स्थिति को दर्शाता है, जहां मन पूरी तरह से ईश्वर के प्रति समर्पित हो जाता है। साधक की यह कामना है कि उसकी चेतना, भावनाएं, और विचार हमेशा भगवान की आराधना में डूबे रहें।

गहराई से अर्थ:
यह केवल बाहरी पूजा की बात नहीं करता, बल्कि आंतरिक ध्यान और समर्पण का प्रतीक है। ‘मन लीन रहे’ का तात्पर्य यह है कि साधक सांसारिक विकर्षणों से मुक्त होकर ईश्वर के साथ एकात्मकता का अनुभव करना चाहता है। जब मन भगवान की पूजा में लीन होता है, तब व्यक्ति अहंकार, मोह और माया से ऊपर उठ जाता है।


मेरा मस्तक हो और द्वार तेरा

यहां साधक की विनम्रता का प्रदर्शन होता है। ‘मस्तक’ झुकाना केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं है, बल्कि अहंकार और आत्म-प्रशंसा का पूर्णतः परित्याग है। साधक इस वाक्य के माध्यम से कहता है कि उसका हर कर्म, हर विचार भगवान के द्वार की ओर झुका हुआ हो।

गहराई से अर्थ:
भगवान के द्वार का प्रतीक यह है कि साधक हमेशा धर्म और सत्य के मार्ग पर अग्रसर रहे। ‘द्वार’ वह स्थान है, जहां भौतिकता समाप्त होती है और आध्यात्मिक यात्रा का आरंभ होता है।


मीट जाये जन्मों की तृष्णा, श्री राम मिले जो प्यार तेरा

यह वाक्य सांसारिक इच्छाओं और तृष्णाओं के अंत की कामना व्यक्त करता है। साधक भगवान श्री राम के प्रेम को जीवन का अंतिम लक्ष्य मानता है।

गहराई से अर्थ:
‘जन्मों की तृष्णा’ का तात्पर्य जीवन के चक्र में बार-बार जन्म लेने और सांसारिक भोगों की खोज से है। तृष्णा वह जड़ है, जो व्यक्ति को भौतिक संसार से बांधे रखती है। श्री राम का प्रेम इस तृष्णा का अंत करता है, क्योंकि यह प्रेम आत्मा को पूर्णता और मोक्ष प्रदान करता है।


तुझमें खोकर जीना है मुझे

यह साधक के आत्मा और परमात्मा के बीच के रिश्ते की बात करता है। ‘तुझमें खोकर जीना’ का अर्थ है, अपने व्यक्तिगत अहंकार और पहचान का अंत करके केवल ईश्वर में विलीन हो जाना।

गहराई से अर्थ:
यह विचार अद्वैत दर्शन के सिद्धांत से मेल खाता है, जिसमें आत्मा और परमात्मा को अलग-अलग नहीं माना जाता। जब साधक ‘तुझमें खोकर’ जीने की बात करता है, तो वह यह कह रहा है कि उसका अस्तित्व तभी सार्थक है, जब वह ईश्वर के साथ एकाकार हो।


मैं बूँद हूँ तु इक सागर है

इस पंक्ति में साधक स्वयं की क्षुद्रता और भगवान की अनंतता को स्वीकार करता है। वह अपनी सीमितता को समझता है और भगवान की असीमता को नमन करता है।

गहराई से अर्थ:
‘बूँद’ और ‘सागर’ का संबंध यह दर्शाता है कि बूँद अपने अस्तित्व का अर्थ केवल तब पाती है, जब वह सागर में विलीन हो जाती है। उसी प्रकार, साधक का जीवन केवल तभी सार्थक होता है, जब वह भगवान के साथ एक हो जाता है। यह अस्तित्व के एकत्व और समर्पण का प्रतीक है।


तुझ बिन जीवन का अर्थ है क्या

यह प्रश्न आत्मा के उद्देश्य और उसकी पूर्णता की खोज का प्रतीक है। साधक स्पष्ट करता है कि भगवान के बिना जीवन शून्य और निरर्थक है।

गहराई से अर्थ:
यहां साधक इस सत्य को स्वीकार करता है कि सांसारिक सफलता, भौतिक सुख, और सामाजिक पहचान भगवान के बिना निरर्थक हैं। यह पंक्ति भक्त के भीतर जागे उस भाव को प्रकट करती है, जो उसे संसार से अलग करके ईश्वर के करीब ले जाती है।


मैं तारा हूँ तु अम्बर है

यह भगवान और भक्त के बीच के संबंध को और अधिक स्पष्ट करता है। तारा अपने प्रकाश और अस्तित्व के लिए आकाश पर निर्भर है।

गहराई से अर्थ:
साधक स्वीकार करता है कि उसका अस्तित्व भगवान के अस्तित्व पर निर्भर है। ‘अम्बर’ की व्यापकता और असीमता भगवान की अनंतता का प्रतीक है, जबकि ‘तारा’ सीमितता और नश्वरता को दर्शाता है। यह आत्मा और परमात्मा के बीच के शाश्वत संबंध की व्याख्या करता है।


तुने मुझको स्वीकार किया, क्या कम है ये उपकार तेरा

यह पंक्ति साधक की विनम्रता और भगवान के प्रति आभार को दर्शाती है। भगवान का साधक को स्वीकार करना, उसके लिए सबसे बड़ा वरदान है।

गहराई से अर्थ:
भगवान के ‘स्वीकार’ का अर्थ है, उनकी कृपा और प्रेम का साधक की ओर प्रवाहित होना। यह पंक्ति साधक के इस विश्वास को व्यक्त करती है कि भगवान की स्वीकृति ही उसे मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करती है।


यूँ मुझको तेरा प्यार मिला

यह पंक्ति उस अद्वितीय अनुभव का वर्णन करती है, जहां साधक को भगवान का प्रेम प्राप्त होता है। यह अनुभव साधक के जीवन में पूर्ण परिवर्तन लाता है, जैसे निर्जीव वस्तु में प्राण आ गए हों।

गहराई से अर्थ:
‘तेरा प्यार मिला’ का तात्पर्य उस ईश्वरीय कृपा से है, जो साधक के जीवन को अर्थ और उद्देश्य देती है। भगवान का प्रेम न केवल साधक को नया दृष्टिकोण प्रदान करता है, बल्कि उसे अपने जीवन की वास्तविक दिशा भी दिखाता है। यह प्रेम सांसारिक प्रेम से परे है—यह स्थायी, शाश्वत और शुद्ध है।


बेजान को जैसे जान मिली

यह पंक्ति भगवान के प्रेम की शक्ति को दर्शाती है। यह प्रेम साधक को सांसारिक भ्रम से मुक्त करके एक नई चेतना प्रदान करता है।

गहराई से अर्थ:
यहां ‘बेजान’ का अर्थ केवल शारीरिक रूप से जीवित व्यक्ति से नहीं है, बल्कि आत्मिक रूप से खोए हुए व्यक्ति से है। भगवान का प्रेम उस खोई हुई आत्मा को पुनर्जीवित करता है और उसे आध्यात्मिक रूप से जागृत करता है। यह पंक्ति आत्मा के पुनर्जन्म का प्रतीक है, जहां साधक जीवन को नये दृष्टिकोण से देखता है।


जिस दिन से तुझको जाना है, मुझको मेरी पहचान मिली

यह पंक्ति आत्म-बोध और ईश्वर के साथ साक्षात्कार के महत्व को दर्शाती है। साधक यह स्वीकार करता है कि जब से उसने भगवान को जाना है, तभी से उसने अपनी असली पहचान पाई है।

गहराई से अर्थ:
यहाँ ‘पहचान’ का अर्थ सांसारिक नाम और रूप से नहीं, बल्कि आत्मा की वास्तविकता से है। भगवान के साथ साक्षात्कार साधक को यह समझने में मदद करता है कि उसका अस्तित्व केवल परमात्मा में विलीन होने के लिए है। यह भौतिक पहचान से परे आत्मा की पहचान है, जो उसकी ईश्वरीय मूल से जुड़ी है।


देदी तुने चरणों में जगह

यह पंक्ति साधक के प्रति भगवान की कृपा और दयालुता का प्रतीक है। भगवान का चरणों में स्थान देना साधक के लिए सबसे बड़ा सम्मान और वरदान है।

गहराई से अर्थ:
‘चरणों में जगह’ केवल शरण प्राप्त करने का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह भगवान के संरक्षण और आध्यात्मिक मार्गदर्शन को भी दर्शाता है। यह साधक की सुरक्षा, शांति और मोक्ष के लिए भगवान के प्रति गहरी कृतज्ञता को प्रकट करता है। भगवान के चरणों में स्थान मिलना, सांसारिक बंधनों से मुक्ति और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक है।


क्या कम है ये उपकार तेरा

यह पंक्ति साधक की कृतज्ञता और भगवान की कृपा के महत्व को व्यक्त करती है। साधक भगवान की कृपा को सबसे बड़ा वरदान मानता है।

गहराई से अर्थ:
यह विचार भक्त और भगवान के बीच गहरे रिश्ते को दर्शाता है। भगवान का हर छोटा-सा उपकार साधक के लिए अमूल्य होता है। यह साधक को अपने जीवन में भगवान की भूमिका और उनकी दया को पहचानने की प्रेरणा देता है।


मीट जाये जन्मों की तृष्णा, श्री राम मिले जो प्यार तेरा

यह पंक्ति भौतिक इच्छाओं और जन्म-जन्मांतर के चक्र से मुक्ति पाने की कामना करती है। साधक की केवल एक इच्छा है—श्री राम का प्रेम।

गहराई से अर्थ:
जन्मों की तृष्णा का तात्पर्य जीवन के चक्र में फंसी आत्मा की उन अनंत इच्छाओं से है, जो इसे भौतिक संसार में बांधे रखती हैं। ‘श्री राम का प्यार’ इस तृष्णा का अंत करता है, क्योंकि यह प्रेम आत्मा को परम शांति, पूर्णता और मोक्ष प्रदान करता है। साधक मानता है कि यह प्रेम ही जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य है।


आध्यात्मिक संदेश: समर्पण और शांति का मार्ग

इस भजन का समग्र संदेश भक्ति और समर्पण की महिमा का वर्णन करता है। यह साधक को यह सिखाता है कि जीवन का असली उद्देश्य भगवान की शरण में रहना और उनकी कृपा से आत्मिक शांति प्राप्त करना है।

भजन के मूल संदेश:

  1. सांसारिक तृष्णाओं का त्याग: भगवान के प्रेम से सभी इच्छाएं और दुख समाप्त हो जाते हैं।
  2. ईश्वर के प्रति समर्पण: अपनी चेतना को ईश्वर में विलीन करना ही सच्चा भक्ति मार्ग है।
  3. कृतज्ञता का महत्व: भगवान की कृपा को पहचानना और उसके लिए आभार व्यक्त करना आध्यात्मिक विकास का आधार है।
  4. आत्मा की पहचान: ईश्वर के साथ जुड़ने पर ही आत्मा को अपनी वास्तविकता और उद्देश्य का बोध होता है।

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